उत्तराखंड का सामान्य ज्ञान Part-7

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उत्तराखंड का सामान्य ज्ञान Part-7

उत्तराखंड का सामान्य ज्ञान Pdf-7 सभी कॉम्पीटिशन जैसेः Banking ,SSC ,Police ,Army Navey आदि एग्जाम के समान्य ज्ञान के सेक्शन के अन्दर सभी राज्य की समान्य ज्ञान से सम्बंधित से प्रश्न ही पूछे जाते है और यदि कोई भी उत्तराखंड पुलिस या कोई राज्य लेवल का एग्जाम है उसके अन्दर सबसे ज्यादा राज्य से सम्बंधित सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछते है जैसेः राज्य की जनसँख्या ,राजभाषा ,राजधानी आदि से सबंधित बहुत से प्रश्न बनते है इसलिए कोई भी उमीदवार जो किसी कॉम्पीटिशन एग्जाम कि तैयारी कर रहा है उसे सभी राज्य समान्य ज्ञान से सम्बंधित से रिलेटेड जानकारी होनी चाहिए तभी वाह समान्य ज्ञान के सेक्शन को अच्छी तरह से और जल्दी कर सकता है तो आज हम उत्तराखंड के वन,उत्तराखंड में वनों से सम्बंधित आन्दोलन उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे जो अक्सर एग्जाम में पूछे जाते है|

उत्तराखंड के वन (Forests of Uttarakhand)

राष्ट्रीय वन नीति (National Forest Policy) 1998 के अनुसार देश की कुल क्षेत्रफल के 33% भाग पर वन होने आवश्यक है, जिसमें पर्वतीय क्षेत्र में कम से कम 60% और मैदानी क्षेत्रों में कम से कम 25% वन होने आवश्यक है।

उत्तराखंड वन सांख्यिकी (Uttarakhand Forest Statistics) के अनुसार राज्य में रिकॉर्डेड (Recorded) वन का कुल क्षेत्रफल (Area) 37999.60 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 71.05 % है। जिसमे से वन विभाग (Forest Department) के अधीन 25,863.18 वर्ग किमी. व वन पंचायतों (Van Panchayats) के अधीन 12,089 वर्ग किमी. है, आकड़ों के अनुसार वनों को निम्न 3 भागो में बाँटा गया हैं :-

उत्तराखंड में पाये जाने वाले वनों के प्रकार

 उपोष्ण कटिबन्धीय वन

  • ये वन 750 से 1200 मीटर की ऊंचाई पर पाये जाते है साल इन वनों का प्रमुख वृक्ष है इसमें उत्तराखंड का उप हिमालय क्षेत्र आता है

 उष्ण कटिबन्धीय शुष्क वन

  • ये वन 1500 मीटर ऊंचाई से कम वाले ऐसे क्षेत्रो में पाये जाते है जहा वर्षा कम होती है , इन वनों की मुख्य वृक्ष जामुन , गूलर, ढाक आदि है

 उष्ण कटिबन्धीय आद्र पतझड़ वन

  • ये वन शिवालिक क्षेत्रो तथा दून क्षेत्रो में पाये जाते है इन्हें मानसूनी वन भी कहते है इन वनों की मुख्या प्रजातियाँ सागौन, शहतूत, साल , बांस आदि है

 कोणधारी वन

  • ये वन 900-1800 मीटर ऊंचाई पर पाये जाते है , चीड़ इनका मुख्या वृक्ष है

 पर्वतीय शीतोष्ण वन

  • ये वन 1800-2700 मीटर की ऊंचाई पर पाये जाते है चीड़, देवदार, स्प्रूस, फर आदि इनके मुख्या वृक्ष है|

 उप एल्पाइन तथा एल्पाइन वन

  • ये वन 2700 मीटर से अधिक ऊंचाई पर मिलते है बुरांश,पाइन , फर, देवदार इनकी मुख्या प्रजातियाँ है

 घास के मैदान (बुग्याल )

  • मध्य हिमालय में 3800 से 4200 मीटर की ऊंचाई पर घास के मैदान पाये जाते है इन्हें बुग्याल कहा जाता है |

उत्तराखंड में पाये जाने वाले वनों के बारे में कुछ बाते

  • उत्तराखंड में वन सम्पदा का अतुल भंडार है नवीनतम आंकड़ो के अनुसार उत्तराखंड में 34,650 वर्ग किमी में वनों का विस्तार है
  • उत्तराखंड में 600-1200 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रो में वनों का प्रतिशत 16.3 तथा 1200 से 1800 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रो में 22.3 प्रतिशत तथा 1800 से 3000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रो में सर्वाधिक 22.3 प्रतिशत वन है और 3000 मीटर से ऊंचाई वाले क्षेत्रो में केवल 7.5 प्रतिशत वन क्षेत्र है|
  • 14 वे वन रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल क्षेत्रफल के 46.73 प्रतिशत भाग पर वन है इसमें से 19.61 % भाग पर अति सघन  वन , 56.11% भाग पर मध्यम सघन वन व 24.27% भाग पर खुले वन है
  • उत्तराखंड में कुल वनों के 49.63 % आरक्षित वन , 18.48 % संरक्षित वन तथा 2.93 % अवर्गीकृत वनों के अंतर्गत आते है|
  • उत्तराखंड में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल पौड़ी गढ़वाल जिले में तथा सबसे कम वें क्षेत्रफल उधम सिंह नगर में है|
  • उत्तराखंड में सबसे अधिक सघन वन नैनीताल में , सबसे अधिक मध्यम सघन वन पौड़ी तथा सर्वाधिक खुले वन पौड़ी जनपद में है|
  • राज्य में कुल वनों का 59.70% गढ़वाल मण्डल में तथा 40.30 % कुमाऊं मण्डल में है|
  • उत्तराखंड में नदी बेसिनो के कुल क्षेत्रफल में वनों के क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वन टोंस बेसिन में है
  • उत्तराखंड में कुल वन क्षेत्रफल का 70.46 % वन विभागाधीन , 13.76 % राजस्व विभागाधीन , 15.32 प्रतिशत वन पंचायाताधीन तथा .46 % निजी वन है

उत्तराखंड में वनों से सम्बंधित आन्दोलन

चिपको आन्दोलन (Chipako movemen)

चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन है। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य (तब उत्तर प्रदेश का भाग) में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे।

यह आन्दोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन1973 में प्रारम्भ हुआ। एक दशक के अन्दर यह पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में फैल गया। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था। इस आन्दोलन की शुरुवात 1973में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा, कामरेड गोविन्द सिंह रावत, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेत्रत्व मे हुई थी। यह भी कहा जाता है कि कामरेड गोविन्द सिंह रावत ही चिपको आन्दोलन के व्यावहारिक पक्ष थे, जब चिपको की मार व्यापक प्रतिबंधों के रूप में स्वयं चिपको की जन्मस्थली की घाटी पर पड़ी तब कामरेड गोविन्द सिंह रावत ने झपटो-छीनो आन्दोलन को दिशा प्रदान की। चिपको आंदोलन वनों का अव्यावहारिक कटान रोकने और वनों पर आश्रित लोगों के वनाधिकारों की रक्षा का आंदोलन था रेणी में 24 सौ से अधिक पेड़ों को काटा जाना था, इसलिए इस पर वन विभाग और ठेकेदार जान लडाने को तैयार बैठे थे जिसे गौरा देवी जी के नेतृत्व में रेणी गांव की 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर असफल कर दिया था

रंवाई आन्दोलन

टिहरी में राजा मानवेन्द्र शाह के समय में एक कानून बनाया गया जिसके अंतर्गत किसानो की भूमि को वन भूमि में सामिल करने की बात की गयी , इस व्यस्था के खिलाप टिहरी की जनता ने आन्दोलन शुरू कर दिया , जिसमे 30 मई 1930 को दीवान चक्रधर जुयाल की आज्ञा से  सेना द्वारा चलायी गोलियों से अनेक आन्दोलनकारी शहीद हो गए , इस क्षेत्र में आज भी 30 मई को शहीद दिवस मनाया जाता है
रंवाई आन्दोलन को तिलाड़ी आन्दोलन के नाम से भी जाना जाता है

डूंगी – पैंतोली आन्दोलन

यह आन्दोलन चमोली जनपद में बांज के जंगल काटने के विरोध में हुआ

पाणी राखो आन्दोलन

यह आन्दोलन पौड़ी जनपद के उफरेंखाल गाँव में पानी की कमी को दूर करने के लिए चलाया गया, इस आन्दोलन के परिणाम स्वरुप पानी की कमी से बंजर भूमि पुनः हरी भरी हो गयी
इस आंदोलन के सूत्रधार यहाँ के शिक्षक सच्चिदानंद भारती थे जिन्होंने ‘ दूधातोली लोक विकास संस्थान‘ का गठन किया

उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान

वन्य जीवो के संरक्षण के लिए उत्तराखंड में 6 राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) है जो निम्नलिखित है|

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (Jim Corbett National Park)

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है और 1936 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। यह उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया था जिन्होंने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाघ परियोजना पहल के तहत आने वाला यह पहला पार्क था। यह एक गौरवशाली पशु विहार है। यह रामगंगा की पातलीदून घाटी में 1318.54 वर्ग किलोमीटर में बसा हुआ है जिसके अंतर्गत 821.99 वर्ग किलोमीटर का जिम कॉर्बेट व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र भी आता है।

पार्क में उप-हिमालयन बेल्ट की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं हैं। यह एक इकोटोरिज़्म गंतव्य भी है और यहाँ पौधों की 488 प्रजातियां और जीवों की एक विविधता है। पर्यटन की गतिविधियों में वृद्धि और अन्य समस्याएं पार्क के पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहीं हैं।

 गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान (Govind National Park)

गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान उत्तरकाशी जिले में स्थित है इसकी स्थापना 1980 में की गयी , यह राष्ट्रीय उद्यान 472 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है
गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान में भूरा भालू ,  कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, काला  भालू , मोनाल आदि पशु-पक्षी पाये जाते है

 नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान (Nandadevi National Park)

नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान चमोली जिले में 624 वर्ग किमी में फैला है , इसकी स्थापना 1982 में की गयी , इस पार्क में हिमालयन भालू, मोनाल, कस्तूरी मृग , भरल आदि पशु-पक्षी पाये जाते है

 फूलो की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park)

फूलों की घाटी चमोली जिले में जोशीमठ -बद्रीनाथ मार्ग पर नर एवं गंध मादन पर्वतो के बीच में भ्युंडार घाटी में स्थित है , फूलों की घाटी की खोज सन 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक सिडनी स्माइथ ने की , उन्होंने यहाँ अपने साथी होल्ड्सवर्थ  की सहायता से फूलो की  250 किस्मो का पता लगाकर 1947 में अपनी पुस्तक फूलों की घाटी (Valley of flowers) में प्रकाशित किया|
फूलो की घाटी को 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया तथा वर्ष 2005 में फूलों की घाटी को विश्व धरोहर में सामिल किया गया |
फूलो की घाटी के कुछ अन्य नाम नंदन कानन, अलका, गंधमाधन, बैकुंठ,  पुश्पावाली, पुष्परसा तथा फ्रैंक स्माइथ घाटी हैं

 राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park)

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान हरिद्वार, देहरादून तथा पौड़ी गढ़वाल जिलो में 820.42 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना 1983 में की गयी , इसका मुख्यालय देहरादून में है|

 गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park)

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान उत्तरकाशी जिले में 2390 वर्ग किमी में विस्तृत उत्तराखंड का सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला राष्ट्रीय उद्यान है इसकी स्थापना 1989 में की गयी

उत्तराखंड के वन्य जीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary of Uttarakhand)

उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान के आकर्षक स्थलों की अविश्वसनीय विविधता को दर्शाता है वो कि वन्य जीवन की महान उपस्थिति के साथ भरी हैं। इन राष्ट्रीय उद्यानों में उत्तराखंड के साथ पेड़, फूल-पौधों, shrubs, जड़ी बूटियों के एक पूरे कबूदले डोवेरेद कर रहे हैं. अधिकांश अवसरों पर, राष्ट्रीय उद्यान एक विशेष रूप से करने के लिए एक राष्ट्र से संबंधित सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले सुस्वाद परिदृश्य के रिजर्व टुकड़े कर रहे हैं। Austerely राष्ट्रीय उद्यान अन्य वन्यजीव संरक्षण केन्द्रों से demarcates सबसे महत्वपूर्ण है तथ्य यह है कि किसी भी तरह मानव घुसपैठ या खतरनाक प्रदूषण की कड़ाई वर्जित हैं। उत्तराखंड में कुल 7 वन्य जीव विहार (अभ्यारण्य )है |

 केदारनाथ वन्य जीव विहार (Kedarnath Wildlife Sanctuary)

केदारनाथ वन्य जीव विहार जनपद चमोली तथा रुद्रप्रयाग में 957 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन् 1972 में की गयी , यहाँ मुख्यतः भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घुरल, काकड़ , जंगली सूअर आदि जीव पाये जाते है , यह उत्तराखंड का सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला वन्य जीव विहार है|

 अस्कोट वन्य जीव विहार (Askot Wildlife Sanctuary)

अस्कोट वन्य जीव विहार जनपद पिथोरागढ़  में 600 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन् 1986 में की गयी, अस्कोट  वन्य जीव अभ्यारण्य कस्तूरी मृग के लिए प्रसिद्ध है

 गोविन्द वन्य जीव विहार (Govind Wildlife Sanctuary)

गोविन्द  वन्य जीव विहार जनपद उत्तरकाशी  में 485 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन् 1955 में की गयी, यहाँ पर मुख्यतः भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घुरल, काकड़ , जंगली सूअर, जंगली बिल्ली, आदि जानवर पाये जाते है |

 सोनानदी वन्य जीव विहार (Sonanadi Wildlife Sanctuary)

सोनानदी  वन्य जीव विहार जनपद पौड़ी गढ़वाल में 301वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन्1987 में की गयी, यहाँ पर मुख्यतः हाथी , शेर , घुरल, काकड़ , जंगली सूअर, मगर, घड़ियाल, अजगर आदि जानवर पाये जाते है

 बिनसर वन्य जीव विहार (Binsar Wildlife Sanctuary)

बिनसर  वन्य जीव विहार जनपद अल्मोड़ा  में 47 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन् 1988 में की गयी, यहाँ पर मुख्यतः काला  भालू, , घुरल, काकड़ , जंगली सूअर, जंगली बिल्ली, आदि जानवर पाये जाते है

 मसूरी वन्य जीव विहार (Mussoorie Wildlife Sanctuary)

मसूरी  वन्य जीव विहार जनपद देहरादून  में 11  वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन् 1993 में की गयी, यहाँ पर मुख्यतः काला  भालू,  लंगूर, बन्दर ,घुरल, काकड़ , जंगली सूअर आदि जानवर पाये जाते है

 नन्धौर वन्य जीव विहार (Nandhaur Wildlife Sanctuary)

नन्धौर  वन्य जीव विहार जनपद नैनीताल व चम्पावत  में 270 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है इसकी स्थापना सन्2012 में की गयी, यहाँ पर मुख्यतः  भालू, बाघ, लंगूर आदि जानवर पाये जाते है

उत्तराखंड के प्रमुख खनिज

उत्तराखंड में चूना पत्थर, राक फास्फेट, डोलोमाइट, मैग्नेसाइट, तांबा, ग्रेफाइट, जिप्सम आदि के भंडार हैं।  राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय शृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढ़का हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढ़की हुई हैं जिनका पहले अंग्रेज़ लकड़ी व्यापारियों और स्वतन्त्रता के बाद वन अनुबन्धकों द्वारा दोहन किया गया। हाल ही के वनीकरण के प्रयासों के कारण स्थिति प्रत्यावर्तन करने में सफलता मिली है। हिमालय के विशिष्ठ पारिस्थितिक तन्त्र बड़ी संख्या में पशुओं – जैसे भड़ल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ, और बाघ, पौंधो, और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का घर है।

उत्तराखंड राज्य में खनिज कम ही मात्र में उपलब्ध है , कुछ प्रमुख खनिज पदार्थ और उनके प्राप्ति स्थल  निम्नलिखित है

  1. टिन – चमोली
  2. लोहा– नैनीताल , टिहरी, पौड़ी ,चमोली
  3. चांदी – अल्मोड़ा
  4. बेराइट्स – देहरादून
  5. सोप स्टोन – अल्मोड़ा , बागेश्वर, पिथोरागढ़, चमोली
  6. जिप्सम – देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, टिहरी
  7. सोना – शारदा, पिंडर , रामगंगा व अलकनंदा नदियों की रेत में
  8. गंधक – चमोली, देहरादून
  9. सीसा – पिथोरागढ़, अल्मोड़ा, देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी
  10. स्लेट्स – उत्तरकाशी,नैनीताल, पौड़ी
  11. ग्रेफाइट – अल्मोड़ा, पौड़ी, नैनीताल
  12. चूना पत्थर – देहरादून, पिथोरागढ़, टिहरी, चमोली
  13. मैग्नेसाईट – चमोली, बागेश्वर, पिथोरागढ़
  14. संगमरमर – देहरादून, टिहरी, नैनीताल
  15. फास्फोराईट – देहरादून, टिहरी
  16. डोलोमाईट – देहरादून, पिथोरागढ़, टिहरी
  17. तांबा – चमोली, पौड़ी, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, नैनीताल

हमने इस पोस्ट में  उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान एवम् अभ्यारण की सूची उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य  उत्तराखंड में लोहा कहा पाया जाता है खनिज मोहर्रिर उत्तराखंड मानचित्र उत्तराखंड के प्रमुख मेले biosphere reserve in uttarakhand nandhaur wildlife sanctuary nandhaur range, uttarakhand uttarakhand wildlife  वन पंचायत अधिनियम उत्तराखंड वन नीति  से संबंधित  जानकारी दी हैऔर आगे आने वाली परीक्षाओं में भी इनमें से काफी प्रश्न पूछे जा सकते हैं. तो इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ें. अगर इनके बारे में आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके पूछो और अगर आपको यह  जानकारी  फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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